Tuesday, 18 October 2022

TANSEN/ तानसेन

तानसेन या रामतनु हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के एक महान ज्ञाता थे। उन्हे सम्राट अकबर के नवरत्नों में भी गिना जाता है।
                Tansen/तानसेन
संगीत सम्राट तानसेन की नगरी ग्वालियर के लिए कहावत प्रसिद्ध है कि यहाँ बच्चे रोते हैं, तो सुर में और पत्थर लुढ़कते हैं तो ताल में। इस नगरी ने पुरातन काल से आज तक एक से बढ़कर एक संगीत प्रतिभाएं संसार को दी हैं और संगीतकार सूर्य तानसेन इनमें सर्वोपरि हैं।[1]

तानसेन को संगीत का ज्ञान कैसे प्राप्त हुआ? तानसेन हरिदास के साथ वृन्दावन संगीत की शिक्षा ग्रहण की। तानसेन ने मानसिंह की विधवा पत्नी मृगनयनी से संगीत की शिक्षा प्राप्त की।
                  Tansen / तानसेन

प्रारम्भ से ही तानसेन मे दूसरों की नकल करने की अपूर्व क्षमता थी। बालक तानसेन पशु-पक्षियों की तरह- तरह की बोलियों की सच्ची नकल करता था और हिंसक पशुओं की बोली से लोगों को डराया करता था। इसी बीच स्वामी हरिदास से उनकी भेंट हो गयी । उनसे मिलने की भी एक मनोरंजक घटना है।

उनकी अलग-अलग बोलियों को बोलने की प्रतिभा को देखकर वो काफी प्रभावित हुए। स्वामी जी ने उन्हें उनके पिता से संगीत सिखाने के लिए माँग लिया।इस तरह तानसेन को संगीत का ज्ञान हुआ। 1586 में तानसेन की मृत्यु आगरा में हो गई। और संगीतकार तानसेन की इच्छा अनुसार मोहम्मद गौस के मकबरे के समीप तानसेन का मकबरा बनाया गया जो ग्वालियर में हैं।

वे स्वर-ताल में गीतों की रचना भी करते थे। तानसेन के तीन ग्रन्थों का उल्लेख मिलता है-

1. 'संगीतसार',

2. 'रागमाला'

3. 'श्रीगणेश स्तोत्र'।

भारतीय संगीत के इतिहास में ध्रुपदकार के रूप में तानसेन का नाम सदैव अमर रहेगा। इसके साथ ही ब्रजभाषा के पद साहित्य का संगीत के साथ जो अटूट सम्बन्ध रहा है, उसके सन्दर्भ में भी तानसेन चिरस्मरणीय रहेंगे।

संगीत सम्राट तानसेन अकबर के अनमोल नवरत्नों में से एक थे। अपनी संगीत कला के रत्न थे। इस कारण उनका बड़ा सम्मान था। संगीत गायन के बिना ‍अकबर का दरबार सूना रहता था। तानसेन के ताऊ बाबा रामदास उच्च कोटि के संगीतकार थे। वह वृंदावन के स्वामी हरिदास के शिष्य थे। उन्हीं की प्रेरणा से बालक तानसेन ने बचपन से ही संगीत की शिक्षा पाई। स्वामी हरिदास के पास तानसेन ने बारह वर्ष की आयु तक संगीत की शिक्षा पाई। वहीं उन्होंने साहित्य एवं संगीत शास्त्र की शिक्षा प्राप्त की।
             तानसेन राग मेघ गाते हुए 
संगीत की शिक्षा प्राप्त करके तानसेन देश यात्रा पर निकल पड़े। उन्होंने अनेक स्थानों की यात्रा की और वहाँ उन्हें संगीत-कला की प्रस्तुति पर बहुत प्रसिद्धि तो मिली, लेकिन गुजारे लायक धन की उपलब्धि नहीं हुई।

एक बार वह रीवा (मध्यप्रदेश) के राजा रामचंद्र के दरबार में गाने आए। उन्होंने तानसेन का नाम तो सुना था पर गायन नहीं सुना था। उस दिन तानसेन का गायन सुनकर राजा रामचंद्र मुग्ध हो गए। उसी दिन से तानसेन रीवा में ही रहने लगे और उन्हें राज गायक के रूप में हर तरह की आर्थिक सुविधा के साथ सामाजिक और राजनीतिक सम्मान दिया गया। तानसेन पचास वर्ष की आयु तक रीवा में रहे। इस अवधि में उन्होंने अपनी संगीत-साधना को मोहक और लालित्यपूर्ण बना लिया। हर ओर उनकी गायकी की प्रशंसा होने लगी।

अकबर के ही सलाहकार और नवरत्नों में से एक अब्दुल फजल ने तानसेन की संगीत की प्रशंसा में अकबर को चिट्ठीु लिखी और सुझाव दिया कि तानसेन को अकबरी-दरबार का नवरत्न होना चाहिए। अकबर तो कला-पारखी थे ही। ऐसे महान संगीतकार को रखकर अपने दरबार की शोभा बढ़ाने के लिए बेचैन हो उठे।

उन्होंने तानसेन को बुलावा भेजा और राजा रामचंद्र को पत्र लिखा। किंतु राजा रामचंद्र अपने दरबार के ऐसे कलारत्न को भेजने के लिए तैयार न हुए। बात बढ़ी और युद्ध तक पहुँच गई। और बहुत मान मनब्बल के बाद भी राजा रामचंद्र नहीं माने तो अकबर ने मुगलिया सल्तनत की एक छोटी से टुकड़ी तानसेन को जबरजस्ती लाने के लिए भेज दिया पर राजा राम चंद्र जूदेव और अकबर के सैनिको के बीच युद्ध हुआ और अकबर के सभी सैनिक मारे गए, इसमें रीवा राजा के भी कई सैनिक मारे गए ! इससे अकबर क्रुद्ध होकर एक बड़ी सैनिक टुकड़ी भेजी और रीवा के राजा फिर से युद्ध के लिए तैयार हुए तब तानसेन रीवा के राजा के पास पहुंचे और युद्ध न करने की अपील किया , पर राजा बहुत जिद्दी थे नहीं माने ! और अकबर के दरबार में संदेस भेज दिया की ''यदि बादशाह याचना पात्र भेजे तो मैं तानसेन को भेज दूंगा'' अकबर भी छोटी-छोटी सी बात पर राजपूतो से युद्ध नहीं करना चाहते थे ! तब अकबर ने याचना पात्र भेज दिया तब राजा रामचंद्र जूदेव ने सहर्ष, ससम्मान तानसेन को दिल्ली भेज दिया और एक बड़ा युद्ध टल गया ! अकबर के दरबार में आकर तानसेन पहले तो खुश न थे लेकिन धीरे-धीरे अकबर के प्रेम ने तानसेन को अपने निकट ला दिया।

चाँद खाँ और सूरज खाँ स्वयं न गा सकें। आखिर मुकाबला शुरू हुआ। उसे सुनने वालों ने कहा 'यह गलत राग है।' तब तानसेन ने शास्त्रीय आधार पर उस राग की शुद्धता सिद्ध कर दी। शत्रु वर्ग शांत हो गया।
संगीत सम्राट तानसेन अकबर के अनमोल नवरत्नों में से एक थे। तानसेन को अपने दरबार में लाने के लिए अकबर की सेना और रीवा के बाघेला राजपूतो के बीच में भयानक युद्ध हुआ था ! अकबर के दरबार में तानसेन को नवरत्न की ख्यायति मिलने लगी थी। इस कारण उनके शत्रुओं की संख्यार भी बढ़ रही थी। कुछ दिनों बाद तानसेन का ठाकुर सन्मुख सिंह बीनकार से मुकाबला हुआ। वे बहुत ही मधुर बीन बजाते थे। दोनों में मुकाबला हुआ, किंतु सन्मुख सिंह बाजी हार गए। तानसेन ने भारतीय संगीत को बड़ा आदर दिलाया। उन्होंने कई राग-रागिनियों की भी रचना की। 'मियाँ की मल्हार' 'दरबारी कान्हड़ा' 'गूजरी टोड़ी' या 'मियाँ की टोड़ी' तानसेन की ही देन है। तानसेन कवि भी थे। उनकी काव्य कृतियों के नाम थे - 'रागमाला', 'संगीतसार' और 'गणेश स्रोत्र'। 'रागमाला' के आरंभ में दोहे दिए गए हैं।

सुर मुनि को परनायकरि, सुगम करौ संगीत।
तानसेन वाणी सरस जान गान की प्रीत।

Vikramaditya (विक्रमादित्य )



विक्रमादित्य उज्जैन के राजा थे, जो अपने ज्ञान, वीरता और उदारशीलता के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने पूरे एशिया पर अपना शासन व्यवस्थित किया था। अरब पर इनके शासन का प्रमाण सायार-उल-ओकुल ग्रंथ के पृष्ठ संख्या 315 से मिलता है, इस ग्रंथ की रचना अरबी कवि जरहाम कितनोई ने की। यह ग्रंथ वर्तमान में इस्तांबुल शहर के प्रसिद्ध पुस्तकालय मकतब-ए-सुल्तानिया में स्थित है. वे क्षत्रिय सम्राट थे इनके पिता का नाम राजा गर्दभिल्ल था. सम्राट विक्रमादित्य ने शको को पराजित किया था। उनके पराक्रम को देखकर ही उन्हें महान सम्राट कहा गया और उनके नाम की उपाधि कुल 14 भारतीय राजाओं को दी गई। "विक्रमादित्य" की उपाधि भारतीय इतिहास में बाद के कई अन्य राजाओं ने प्राप्त की थी, जिनमें गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय और सम्राट हेमचन्द्र विक्रमादित्य (जो हेमु के नाम से प्रसिद्ध थे) उल्लेखनीय हैं। राजा विक्रमादित्य नाम, 'विक्रम' और 'आदित्य' के समास से बना है जिसका अर्थ 'पराक्रम का सूर्य' या 'सूर्य के समान पराक्रमी' है।उन्हें विक्रम या विक्रमार्क (विक्रम + अर्क) भी कहा जाता है (संस्कृत में अर्क का अर्थ सूर्य है)।
उज्जैन-महानगर के महाकाल मन्दिर के पास विक्रमादित्य टिला है। वहाँ विक्रमादित्य के संग्रहालय में नवरत्नों की मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं। भारतीय परंपरा के अनुसार धन्वन्तरि, क्षपनक, अमरसिंह, शंकु, खटकरपारा, कालिदास, वेतालभट्ट (या (बेतालभट्ट), वररुचि और वराहमिहिर उज्जैन में विक्रमादित्य के राज दरबार का अंग थे। कहते हैं कि राजा के पास “नवरत्न” कहलाने वाले नौ ऐसे विद्वान थे। कालिदास प्रसिद्ध संस्कृत राजकवि थे। वराहमिहिर उस युग के प्रमुख ज्योतिषी थे, जिन्होंने विक्रमादित्य की बेटे की मौत की भविष्यवाणी की थी। वेतालभट्ट एक धर्माचार्य थे। माना जाता है कि उन्होंने विक्रमादित्य को सोलह छंदों की रचना “नीति-प्रदीप” (“आचरण का दीया”) का श्रेय दिया है। 

  1. विक्रमार्कस्य आस्थाने नवरत्नानि धन्वन्तरिः क्षपणकोऽमरसिंहः शंकूवेताळभट्टघटकर्परकालिदासाः। 
  2. ख्यातो वराहमिहिरो नृपतेस्सभायां रत्नानि वै वररुचिर्नव विक्रमस्य॥

मध्यप्रदेश में स्थित उज्जैन-महानगर के महाकाल मन्दिर के पास विक्रमादित्य टिला है। वहाँ विक्रमादित्य के संग्रहालय में नवरत्नों की मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं।
                         धन्वन्तरी


                          कालीदास

                           घटाकर्पर

                         बेतालभट्ट

                          क्षपणक

                          वारहमिहीर

                           वररुचि

                             शंकु

Sunday, 16 October 2022

अमृता शेरगिल दो राष्ट्रों की एक नायिका

अमृता शेरगिल - 
अमृता शेरगिल (30 जनवरी 1913 - 5 दिसंबर 1941) भारत के प्रसिद्ध चित्रकारों में से एक थीं। उनका जन्म बुडापेस्ट (हंगरी) में हुआ था। कला, संगीत व अभिनय बचपन से ही उनके साथी बन गए। 20वीं सदी की इस प्रतिभावान कलाकार को भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण ने 1976 और 1979 में भारत के नौ सर्वश्रेष्ठ कलाकारों में शामिल किया है। सिख पिता उमराव सिंह शेरगिल (संस्कृत-फारसी के विद्वान व नौकरशाह) और हंगरी मूल की यहूदी ओपेरा गायिका मां मेरी एंटोनी गोट्समन की यह संतान  8 वर्ष की आयु में पियानो-वायलिन बजाने के साथ-साथ कैनवस पर भी हाथ आजमाने लगी थी।

EARLY LIFE

Amrita Shergill was born in Budapest, Hungary on 30th January, 1913 to Umrao Singh Shergill Majithia, a Sikh aristocrat and a Sanskrit and Persian scholar and Marie Antoinette Gottesmann, a Jewish Opera singer from Hungary. Amrita Shergill was born in Budapest, Hungary on 30th January, 1913 to Umrao Singh Shergill Majithia, a Sikh aristocrat and a Sanskrit and Persian scholar and Marie Antoinette Gottesmann, a Jewish Opera singer from Hungary. As her life unfolds, we come to know that she spent most of early childhood in Budapest. She was the niece of Indologist Ervin Baktay. He guided her and gave her an academic foundation to develop on.
1921 में अमृता का परिवार समर हिल शिमला में आ बसा। बाद में अमृता की मां उन्हें लेकर इटली चली गई व फ्लोरेंस के सांता अनुंज़ियाता आर्ट स्कूल में उनका दाखिला करा दिया। पहले उन्होंने ग्रैंड चाऊमीअर में पीअरे वेलण्ट के और इकोल डेस बीउक्स-आर्टस में ल्यूसियन सायमन के मार्गदर्शन में अभ्यास किया। सन 1934 के अंत में वह भारत लौटी। बाईस साल से भी कम उम्र में वह तकनीकी तौर पर चित्रकार बन चुकी थी और असामान्य प्रतिभाशाली कलाकार के लिए आवश्यक सारे गुण उनमें आ चुके थे। पूरी तरह भारतीय न होने के बावजूद वह भारतीय संस्कृति को जानने के लिए बड़ी उत्सुक थी। उनकी प्रारंभिक कलाकृतियों में पेरिस के कुछ कलाकारों का पाश्चात्य प्रभाव प्रभाव साफ झलकता है। जल्दी ही वे भारत लौटीं और अपनी मृत्यु तक भारतीय कला परंपरा की पुन: खोज में जुटी रहीं। उन्हें मुगल व पहाडी कला सहित अजंता की विश्वविख्यात कला ने भी प्रेरित-प्रभावित किया। भले ही उनकी शिक्षा पेरिस में हुई पर अंततः उनकी तूलिका भारतीय रंग में ही रंगी गई। उनमें छिपी भारतीयता का जीवंत रंग हैं उनके चित्र।

अमृता ने अपने हंगेरियन चचेरे भाई से 1938 में विवाह किया, फिर वे अपने पुश्तैनी घर गोरखपुर में आ बसीं। १९४१ में अमृता अपने पति के साथ लाहौर चली गई, वहाँ उनकी पहली बडी एकल प्रदर्शनी होनी थी, किंतु एकाएक वह गंभीर रूप से बीमार पडीं और मात्र 28 वर्ष की आयु में शून्य में विलीन हो गई।
विरासत
शेरगिल की कला ने सैयद हैदर रज़ा से लेकर अर्पिता सिंह तक जैसी भारतीय कलाकारों की पीढ़ियों को प्रभावित किया है और महिलाओं की दुर्दशा के उनके चित्रण ने उनकी कला को भारत और विदेशों में बड़े पैमाने पर महिलाओं के लिए एक प्रकाशस्तम्भ बना दिया है। भारत सरकार ने उनकी कृतियों को राष्ट्रीय कला कोष घोषित किया है और उनमें से अधिकांश को नई दिल्ली के राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय दीर्घा में रखा गया है।

उनकी कुछ चित्र लाहौर संग्रहालय में भी हैं। 1978 में भारतीय डाक द्वारा उनकी चित्र "हिल वुमन" को दर्शाते हुए एक डाक टिकट जारी किया गया था और लुटियंस दिल्ली में उनके नाम पर अमृता शेरगिल मार्ग है। 

उनके काम को भारतीय संस्कृति के लिए इतना महत्वपूर्ण माना जाता है कि जब इसे भारत में बेचा जाता है, तो भारत सरकार ने यह निर्धारित किया है कि कला को देश में रहना चाहिए - उसके दस से भी कम चित्र विश्व स्तर पर बेचे गए हैं। 2006 में, नई दिल्ली की एक नीलामी में उनकी चित्र "विलेज सीन" 6.9 करोड़ में बिकी, जो उस समय भारत में एक चित्र के लिए दी जाने वाली सबसे अधिक राशि थी।

बुडापेस्ट में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र का नाम अमृता शेर-गिल सांस्कृतिक केंद्र है।
भारत में समकालीन कलाकारों ने उसके कामों को फिर से बनाया और व्याख्यायित किया है।

कई समकालीन भारतीय कलाकारों के लिए एक प्रेरणा के अलावा, 1993 में, वे उर्दू नाटक तुम्हारी अमृता के पीछे भी प्रेरणा बनी।[8]

यूनेस्को ने 2013 में शेरगिल के जन्म की 100वीं वर्षगांठ में, अमृता शेर-गिल अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया था।

अमृता चौधरी के समकालीन भारतीय उपन्यास फ़ेकिंग इट में शेरगिल का कार्य एक प्रमुख विषय है।[

सलमान रुश्दी के 1995 के उपन्यास "द मूर्स लास्ट साय" का एक पात्र औरोरा ज़ोगिबी, शेरगिल से प्रेरित था।

शेरगिल को कभी-कभी भारत के फ्रिडा काहलो के रूप में जाना जाता था क्योंकि उन्होंने "क्रांतिकारी" रूप से पश्चिमी और पारंपरिक कला रूपों का मिश्रण किया था।

2018 में, द न्यूयॉर्क टाइम्स ने उनके लिए एक बेल्टेड ऑबिट्यूज़ प्रकाशित किया था।[13]

2018 में, मुंबई में एक सोथबी की नीलामी में, अमृता शेरगिल की पेंटिंग "द लिटिल गर्ल इन ब्लू" को रिकॉर्ड तोड़ 18.69 करोड़ में नीलाम किया गया। यह पेंटिंग शिमला की रहने वाली अमृता के चचेरे भाई बबित का चित्र है और 1934 में चित्रित किया गया था जब वह केवल 8 वर्ष का था।
अमृता शेरगिल: दो राष्ट्रों की एक नायिका

शेरगिल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रभावशाली विचारक हो सकते थे, यदि 1941 में उनकी मृत्यु नहीं हुई होती।

(यह कहानी पहली बार 29 जनवरी 2017 को अमृता शेरगिल की जयंती के अवसर पर प्रकाशित हुई थी।)

अमृता शेरगिल कैसे भारतीय आधुनिक कला की दुनिया में अग्रणी बनीं, इस बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है। मुंबई में प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप शुरू होने से लगभग 20 साल पहले उन्होंने खुद को स्थापित कर लिया था।
            अमृता शेरगिल की पेंटिंग 
उन्होंने एक महिला और एक कलाकार के रूप में रूढ़ियों को तोड़ा। उनकी पेंटिंग नीलामी के रिकॉर्ड को तोड़ना जारी रखती हैं, सबसे हाल ही में 2015 में न्यूयॉर्क में सोथबी की नीलामी में। 1931 के कैनवास पेंटिंग पर एक आत्म चित्र, तेल $ 2.92 मिलियन की भारी कीमत पर बेचा गया था।

अमृता शेर-गिल का एक सेल्फ-पोर्ट्रेट जो 2015 में सोथबी में रिकॉर्ड 2.92 मिलियन डॉलर में बिका।

उनकी जयंती पर, उनकी कला के महत्वपूर्ण तत्वों पर शुरू करने के बजाय, मैं उनके व्यक्तित्व पर ध्यान केंद्रित करना चाहूंगा जिसने उनके संपर्क में आने वालों पर और साथ ही साथ उन लोगों पर भी एक स्थायी प्रभाव डाला, जिन्होंने नहीं किया।
             अमृता शेरगिल की पेंटिंग 
न केवल एक महान कलाकार, शेर-गिल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रभावशाली विचारक हो सकते थे, अगर यह 1941 में 28 साल की छोटी उम्र में उनकी आकस्मिक मृत्यु के लिए नहीं होता।

एक ऐसा सदमा जो उनके कई प्रशंसकों और अनुयायियों के लिए आज भी उनके लिए मुश्किल है।

एक हंगेरियन मां और एक भारतीय सिख पिता के घर जन्मी, उन्होंने भारत की स्वतंत्रता की रोशनी को अपने हाशिये पर फैलते देखा। उन्होंने अनिच्छुक महिलाओं के अपने घरों से बाहर निकलने और अपनी सक्रियता में अपनी पहचान खोजने के संकेतों को पहचाना।
             अमृत शेरगिल की पेंटिंग 
विशेष रूप से बताना उसके विषयों की पसंद है। उन्होंने गोराखपुर के एक गांव सराया की गरीब महिलाओं में जो बेचैनी देखी, उसे दिखाने के लिए उन्होंने चुना।

यशोधरा डालमिया अपनी पुस्तक अमृतिया शेर-गिल - ए लाइफ में लिखती हैं: "वह उनके दम घुटने वाले जीवन को समझती थी, क्षमता की बर्बादी जो उन्हें आसानी से उत्पादक, बाहरी लोगों में बना सकती थी।"

जवाहरलाल नेहरू और सरोजिनी नायडू जैसे स्वतंत्रता सेनानी उनमें एक विचारक-कार्यकर्ता के संकेत अच्छी तरह से पढ़ सकते थे। उनके माता-पिता को एक शोक पत्र में।

नेहरू ने लिखा:, वह भारत के लिए अनमोल थीं और अपनी प्रतिभा के परिपक्व होने की प्रतीक्षा कर रही थीं।

नायडू ने उन्हें "उनकी अद्भुत प्रतिभा और शक्ति" के लिए याद किया।

उनकी आभा आज भी कला और साहित्य की दुनिया में गूंजती है।

इस (अमृता शेरगिल) कलाकार पर बॉलीवुड की मुख्यधारा की बायोपिक में अभिनेता सोनम कपूर के शेर-गिल की भूमिका निभाने की बात सामने आई है।

लेखक सलमान रुश्दी बताते हैं कि द मूर्स में उनका किरदार औरोरा ज़ोगोइबी कैसा है

अमृता शेरगिल: ए सेल्फ-पोर्ट्रेट इन लेटर्स एंड राइटिंग्स, (कलाकार और शेर-गिल के भतीजे विवान सुंदरम द्वारा संपादित), रुश्दी लिखते हैं:
                  अमृता शेरगिल 
मन की यह उग्रता और जुबान की तीक्ष्णता, अपने स्वयं के व्यवहार के बारे में एक बेशर्म खुलेपन के साथ, और जैसा वह चाहती है वैसा व्यवहार करने के अपने अधिकार पर एक आग्रह भी अपने परिवार और दोस्तों के बारे में उसके विचारों में मौजूद है।

लाहौर, वह शहर जहां उन्होंने अंतिम सांस ली और जिसने मरणोपरांत अपना अंतिम एकल शो जल्द ही आयोजित किया, आज भी उनके लिए एक विशेष प्रेम है, भले ही विभाजन के बाद से भारत-पाकिस्तान संबंधों में कोई भी तनाव क्यों न रहा हो।

लाहौर संग्रहालय अभी भी उनके पेंटिंग वीणा प्लेयर्स को उनके स्थायी संग्रह के हिस्से के रूप में प्रदर्शित करता है। शेर-गिल द्वारा 'वीना प्लेयर्स', लाहौर संग्रहालय स्थायी संग्रह का हिस्सा। (फोटो: सहर जमां)
पाकिस्तानी वास्तुकार मारिया वसीम को लाहौर में माल रोड पर एक पुराने बंगले, हाउस नंबर 23, गंगा राम अपार्टमेंट में जाना याद है, जो शेर-गिल का घर हुआ करता था।

पिछले कुछ सालों से, मारिया शेर-गिल की जयंती को चिह्नित करने के लिए अपने फेसबुक पेज पर इस घर की तस्वीरें साझा कर रही हैं, जिसने इस बंगले में नए सिरे से दिलचस्पी दिखाई। यह एक निजी आवास है और आपको प्रवेश करने की अनुमति नहीं है, लेकिन मारिया को हमेशा एक रहस्य के रूप में इसकी ओर खींचा हुआ महसूस होता था।

Saturday, 15 October 2022

Dr. A.P.J Abdul Kalam's Inspirational Speech

#AbdulKalam'sbirthanniversary 
Dr APJ Abdul Kalam was the President of India between 2002-07 and was considered a statesman


A. P. J ABDUL KALAM
Birthday 15 October 
#DrAPJAbdulKalam was one of the foremost scientists of India, he wrote some bestselling books. 
Industrialist #AnandMahindra remembered eminent scientist on the occasion of APJ #AbdulKalam'sbirthanniversary 
Dr APJ Abdul Kalam was the President of India between 2002-07 and was considered a statesman


#DrAPJAbdulKalam was one of the foremost scientists of India, he wrote some bestselling books. He was the President of India between 2002–07 and was considered a statesman. He was also called the "People's President" because the demands of the highest office did not dampen his enthusiasm for meeting people, especially students, a habit he maintained after his term ended.

Kalam contributed to the development of the country in various fields.

As an aerospace scientist, Kalam worked with two of India's leading space research organizations - Defense Research and Development Organization (DRDO) and Indian Space Research Organization (ISRO).

While, his work in the development and operation of indigenous guided missiles – Agni and Prithvi – earned him the title of '#MissileManofIndia' , there are many other ways in which Kalam has helped India in the division of science and technology. He directed the project to develop India's first Satellite Launch Vehicle (SLV). In the 1980s, when India hardly dreamed of having its own indigenous Satellite Launch Vehicle (SLV), Dr Kalam's more than 10 years of hard work as the Project Director for the development of indigenous Satellite Launch Vehicles at ISRO led to led the land. - Breaking down scientific development.

In July 1980, India's SLV-III successfully deployed the Rohini satellite into near-Earth orbit, making the country a member of the elite Space Club.

Wednesday, 12 October 2022

Components of Lesson Plan (Hindi)

शिक्षण का एक महत्वपूर्ण पहलू पाठ योजना पहले से तैयार करना है। एक सफल पाठ योजना के कई घटक होते हैं, जैसे कि एक स्पष्ट उद्देश्य होना, यह जानना कि आपको किन सामग्रियों की आवश्यकता होगी और पाठ के बाद छात्रों का आकलन करने के लिए आप कैसे योजना बनाते हैं। विभिन्न पाठ योजना घटकों को समझने से आपको एक ऐसे पाठ की योजना बनाने में मदद मिल सकती है जो आपके छात्रों के लिए समृद्ध हो और उन्हें सफलता के अवसर प्रदान करे। इस लेख में, हम चर्चा करते हैं कि एक पाठ योजना क्या है, एक पाठ योजना के छह घटक, कक्षा में एक का उपयोग करने के लाभ और कुछ पाठ योजना युक्तियाँ।

एक पाठ योजना क्या है?
एक पाठ योजना इस बात की लिखित रूपरेखा है कि एक पाठ में छात्र कौन से कौशल सीखने जा रहे हैं, शिक्षक इसे कैसे पढ़ाना चाहता है और वे पाठ के अंत में सामग्री के बारे में छात्रों की समझ को कैसे मापेंगे। पाठ योजनाओं का उपयोग करने से शिक्षकों को अपने छात्रों को निर्देश देने के लिए अधिक तैयार होने में मदद मिल सकती है। वे उन्हें अधिक प्रभावी शिक्षक भी बना सकते हैं क्योंकि वे पहले से पाठों की योजना बनाने में समय लेते हैं। अधिकांश पाठ योजनाओं में कई घटक होते हैं जो शिक्षकों को तैयारी से लेकर पाठ के पूरा होने तक विभिन्न भागों की योजना बनाने में मदद करते हैं।

आपके स्कूल जिले और प्रशासन के आधार पर, आपके पाठ योजना में आवश्यक विशिष्ट घटक हो सकते हैं। अपने प्रत्यक्ष पर्यवेक्षक से संपर्क करने पर विचार करें और पूछें कि उन्हें किन तत्वों की आवश्यकता है।

पाठ योजनाओं में अक्सर छह घटक पाए जाते हैं जिन्हें आप अपने स्वयं के पाठों की योजना बनाते समय उपयोग करने का प्रयास कर सकते हैं:

1. उद्देश्य
एक पाठ उद्देश्य पाठ योजना के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक हो सकता है। उद्देश्य परिभाषित करते हैं कि छात्र पाठ के दौरान क्या सीखने जा रहे हैं और समझाते हैं कि सीखने का मूल्यांकन कैसे किया जाएगा। पाठ योजना में उद्देश्य लिखने के बाद, आप इसे पाठ के दिन बोर्ड पर लिख सकते हैं।

शिक्षक आमतौर पर हर दिन उद्देश्यों को अपडेट करते हैं और छात्रों के साथ उनकी समीक्षा करते हैं ताकि वे जान सकें कि वे किस लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।

कुछ अलग प्रारूप हैं जिनका उपयोग आप उद्देश्यों को लिखने के लिए कर सकते हैं। कुछ उस लक्ष्य की व्याख्या करते हैं जिसे छात्र शिक्षक के दृष्टिकोण से प्राप्त करने की उम्मीद करता है और अन्य छात्र के दृष्टिकोण से उद्देश्य की व्याख्या करते हैं। एक प्रभावी उद्देश्य में पाठ के अंत में एक लक्ष्य और मूल्यांकन का एक मापने योग्य रूप शामिल होता है। विभिन्न विषयों के लिए यहां कुछ उदाहरण दिए गए हैं:

कुछ अलग प्रारूप हैं जिनका उपयोग आप उद्देश्यों को लिखने के लिए कर सकते हैं। कुछ उस लक्ष्य की व्याख्या करते हैं जिसे छात्र शिक्षक के दृष्टिकोण से प्राप्त करने की उम्मीद करता है और अन्य छात्र के दृष्टिकोण से उद्देश्य की व्याख्या करते हैं। एक प्रभावी उद्देश्य में पाठ के अंत में एक लक्ष्य और मूल्यांकन का एक मापने योग्य रूप शामिल होता है। विभिन्न विषयों के लिए यहां कुछ उदाहरण दिए गए हैं:

इतिहास: छात्र द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ऐतिहासिक मुद्दों और घटनाओं पर भौगोलिक प्रभाव की समझ को घटनाओं का एक उद्देश्य सारांश बनाकर दिखाएंगे और घटनाओं के भूगोल ने युद्ध को कैसे प्रभावित किया।

गणित: पाठ के अंत तक, छात्र पांच नमूना समस्याओं में से चार को सही ढंग से पूरा करने के लिए जोड़ और गुणा का उपयोग करेंगे।

विज्ञान: **आज मैं वैज्ञानिक पद्धति पर नोट्स लूंगा ताकि मैं उन्हें एक प्रयोग में लागू कर सकूं। जब मैं किसी दिए गए प्रयोग पर लागू होने वाले प्रत्येक चरण को सूचीबद्ध और समझा सकता हूं, तो मुझे पता चल जाएगा कि मुझे यह मिल गया है।**

2. सामग्री
यदि आप पाठ से पहले सामग्री तैयार करते हैं, तो आपके पास शिक्षण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अधिक समय हो सकता है। आप पाठ योजना के भौतिक घटक को प्रत्येक सामग्री के लिए बुलेट पॉइंट बनाकर प्रारूपित करना चुन सकते हैं जिसकी आपको और छात्रों को पाठ के दौरान आवश्यकता हो सकती है। यहां कुछ सामग्रियां हैं जो आमतौर पर एक पाठ के दौरान उपयोग की जाती हैं जिन्हें आप अपनी सूची में जोड़ने पर विचार कर सकते हैं:

यहां कुछ सामग्रियां हैं जो आमतौर पर एक पाठ के दौरान उपयोग की जाती हैं जिन्हें आप अपनी सूची में जोड़ने पर विचार कर सकते हैं:

*पाठ्यपुस्तक
*पेन या पेंसिल
* लाइन वाला पेपर
"*कार्यपत्रकों की मुद्रित प्रतियां
* मार्कर
* कैंची
* कैलकुलेटर
* गोलियाँ
* लैपटॉप
3. पृष्ठभूमि ज्ञान
अधिकांश पाठों को प्रस्तुत करने का एक सहायक तरीका है किसी विषय पर अपने छात्रों के पृष्ठभूमि ज्ञान को सक्रिय करना। पृष्ठभूमि ज्ञान छात्रों के पिछले अनुभवों या किसी विषय पर ज्ञान पर केंद्रित होता है ताकि उन्हें पाठ के दौरान उस विषय के साथ नए संबंध बनाने में मदद मिल सके।

यहां कुछ रणनीतियां दी गई हैं जिनका उपयोग आप अपनी पाठ योजना में कर सकते हैं, जब यह तय कर सकते हैं कि अपने छात्रों को पृष्ठभूमि ज्ञान कैसे पेश किया जाए:

KWL चार्ट: छात्र KWL चार्ट बना सकते हैं जो उन्हें सीखी जा रही जानकारी की पहचान करने में मदद करते हैं। K का अर्थ उस जानकारी से है जो वे पहले से जानते हैं और W किसी भी जानकारी का प्रतिनिधित्व करता है जिसे वे पाठ के विषय के बारे में जानना चाहते हैं। छात्र पाठ के बाद सीखी गई जानकारी को लिखने के लिए L का उपयोग करते हैं।

मल्टीमीडिया: कभी-कभी वीडियो क्लिप या चित्रों जैसे दृश्यों का उपयोग किसी विषय के बारे में छात्र की पृष्ठभूमि के ज्ञान को ट्रिगर करने में मदद कर सकता है।

प्रीटेस्ट: शिक्षक कभी-कभी उस दिन के पाठ पर ढोंग का उपयोग करते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि छात्र पहले से ही विषय के बारे में क्या जानते हैं और पाठ शुरू करने से पहले अपनी समझ का विस्तार करते हैं।

4. प्रत्यक्ष निर्देश
प्रत्यक्ष निर्देश में पाठ का वह भाग शामिल होता है जिसका उपयोग आप कक्षा को उन कौशलों पर निर्देश देने के लिए करते हैं जिन्हें वे सीखने जा रहे हैं।

Monday, 10 October 2022

सिलाई मशीन कैसे काम करती है ?



यदि आपने कभी हाथ से सिलाई करने में समय बिताया है, तो आप जानेंगे कि यह एक कठिन और कभी-कभी दर्दनाक काम है, खासकर जब आप बड़ी परियोजनाओं को नाजुक उंगलियों के साथ जोड़ते हैं जो बार-बार सुइयों से चुभती हैं। सिलाई मशीनें इस काम को बहुत आसान बना सकती हैं और साथ ही चोट से भी बचा सकती हैं।


यद्यपि

पहली सिलाई मशीन डिजाइन 1790 में एक वास्तविकता बन गई, इन मशीनों को अधिक कार्यात्मक भागों और नई क्षमताओं के साथ उन्नत किया गया है जो अब हम आज उपयोग करते हैं।

यद्यपि आपको वास्तव में एक को अलग करने की आवश्यकता नहीं है, नियमित रूप से एक का उपयोग करने से आप सोच रहे होंगे कि सिलाई मशीन कैसे काम करती है। इन मशीनों में कई गतिशील भाग होते हैं, दोनों अंदर और बाहर, जो सभी आपके डिजाइन विचारों और पैटर्न को जीवन में लाने के लिए एक साथ काम करते हैं। सौभाग्य से, सिलाई मशीन के पुर्जे और वे क्या करते हैं, यह जानने के लिए आपको सिलाई मशीन निर्माता या तकनीशियन होने की आवश्यकता नहीं है।

सिलाई मशीन में कौन से भाग होते हैं?

यदि आपने कभी अपनी सिलाई मशीन के कवर को हटा दिया है, तो संभवतः आपने उसमें असंख्य पुली, क्रैंक, गियर और बेल्ट देखे होंगे जो पहली बार में काफी भ्रमित करने वाले लग सकते हैं। हालांकि, इलेक्ट्रिक मोटर से शुरू करते हुए, वे काफी आसानी से एक साथ काम करते हैं। मोटर एक ड्राइव बेल्ट से जुड़ा है। यह बेल्ट तब ड्राइव व्हील को घुमाता है, जो ऊपरी ड्राइव शाफ्ट को घुमाता है। एक बार जब ड्राइव शाफ्ट गति में होता है, तो कवर के नीचे के कई अन्य यांत्रिक भाग इसके साथ चलते हैं।

इन गतिशील भागों में से एक सबसे महत्वपूर्ण है क्रैंक क्योंकि यह वह टुकड़ा है जो सुई को ऊपर और नीचे पैटर्न में ले जाता है जिसका उपयोग वास्तव में आपके द्वारा इसके नीचे रखे गए कपड़े को सिलने के लिए किया जाता है। एक अन्य बेल्ट ऊपरी ड्राइवशाफ्ट को निचले वाले से जोड़ता है, जो मशीन के आधार में तंत्र को स्थानांतरित करता है। ये टुकड़े ऊपरी ड्राइव शाफ्ट और बेल्ट की नकल करते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे सभी अपने आंदोलन में सिंक्रनाइज़ हैं।

सिलाई मशीन में कुछ अन्य महत्वपूर्ण भाग भी होते हैं, जिनमें बोबिन और बोबिन केस, फीड डॉग, हैंड व्हील, स्टिच कंट्रोल, स्टिच सिलेक्टर, थ्रेड टेंशन कंट्रोल, प्रेसर फुट और एक सुई शामिल हैं। भव्य कपड़े, घर की सजावट के सामान, और बहुत कुछ बनाने में आपकी मदद करने के लिए ये सभी भाग एक साथ पूर्ण सामंजस्य में काम करते हैं।

अब जब हमने इस मशीन के मुख्य भागों को जान लिया है, तो आइए देखें कि सिलाई मशीन कैसे काम करती है, कदम दर कदम।


सुई तंत्र

पहली चीज जो हम देखने जा रहे हैं वह यह है कि सिलाई मशीन की सुई कैसे काम करती है। चाहे आप एक शुरुआती सिलाई मशीन या अधिक उन्नत मॉडल खरीद रहे हों, सुई तंत्र समान काम करेगा। सुई अपने ऊपर और नीचे के पैटर्न में जाने के लिए, हमें पहले मशीन के दूसरे छोर को देखना होगा, जहां ऊपरी ड्राइवशाफ्ट स्थित है। ड्राइव शाफ्ट एक मोटर से जुड़ा है।

जब मोटर चल रही होती है, तो ड्राइव शाफ्ट क्रैंकशाफ्ट से जुड़े पहिये को घुमाता है, जो तब पहिया के मुड़ने पर सुई को ऊपर उठाता है और नीचे करता है। मोटर जितनी तेजी से चल रही है, पहिया उतनी ही तेजी से घूमता है, जो सुइयों को ऊपर और नीचे की गति को तेज करता है।

यदि आपको कुछ धीमी गति से काम करने की आवश्यकता है, तो आप हैंडव्हील को अपनी चुनी हुई गति से भी घुमा सकते हैं। यह आपको अधिक सटीक और नाजुक सुईवर्क करने की अनुमति देता है।

बॉबिन कैसे काम करता है?

अब यह सीखने का समय है कि सिलाई मशीन बॉबिन कैसे काम करती है। बोबिन सुई के नीचे एक पैनल के नीचे बैठता है जिसे सुई प्लेट कहा जाता है। सिलाई शुरू करने से पहले इसे इस क्षेत्र में डाला जाता है और इसमें धागे का वही रंग होता है जो सुई की आंख से पिरोया जाता है। आप कुछ शांत विपरीत सीम बनाने के लिए बोबिन में धागे के एक अलग रंग का उपयोग कर सकते हैं या यदि बोबिन धागा वैसे भी नहीं देखा जाएगा।

बोबिन स्वयं हिलता नहीं है, लेकिन यह शटल तंत्र से जुड़ा होता है, जो सुई पर धागे को घुमाता है और पकड़ता है और इसका उपयोग एक लूप बनाने के लिए करता है जो बोबिन के चारों ओर जाता है और सुई लिफ्ट के रूप में बैक अप करता है।


बॉबिन स्टेनलेस स्टील या अन्य धातुओं के साथ-साथ प्लास्टिक सहित कुछ अलग सामग्रियों से बने होते हैं। इन टुकड़ों के लिए मानक आकार 1 इंच है, हालांकि वे आपके सिलाई मशीन के ब्रांड और उम्र के आधार पर -इंच या ½-इंच आकार में भी आ सकते हैं। उनमें से कुछ पहले से ही धागे से भरे हुए हैं, जबकि अन्य खाली बेचे जाते हैं और जरूरत पड़ने पर आपकी पसंद के धागे से भरे जा सकते हैं।

Saturday, 8 October 2022

Five Facts about Indian Air Force


1. Indian Air Force is the fourth largest air force in the world. The Hindon Air Force Station located in Ghaziabad, UP is the largest in Asia.
2. Indian Air Force IAF i.e., Indian Air Force has played an important role in various operations. These include Operation Poomalai, Vijay, Meghdoot and others.
3. The Indian Air Force also works in peacekeeping missions with the IAF United Nations.


4. The Indian Air Force was earlier known as the Royal Indian Air Force. Although this name remained till independence. After independence, the word Royal was dropped.

5. The IAF comprises a large number of women fighter pilots, women navigators and women officers, who render their services to the Indian Air Force. Even the Rafale fleet of the Indian Air Force has a woman fighter pilot.

6. The Indian Air Force has always participated in relief operations during natural calamities in the country. These include the Gujarat cyclone (1998), the tsunami (2004) and the floods in North India. However, the IAF created a world record by rescuing stranded civilians during the floods in Uttarakhand. The mission was named 'Rahat', during which the Indian Air Force rescued around 20,000 people.

Mohar Magri

अकबर ने 1567 ई. में चित्तौड़गढ़ पर हमला करने के लिए तोपें चलवाई, लेकिन दुर्ग की ऊंचाई के कारण गोले किले तक नहीं जा सके। फिर उसने हज़ारों सिपाहि...