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In 1909 S.P.L Sorenson, a Danish biochemist devised a scale known as pH to represents the H+ ion concentration of an aqueous solution. The pH value of any solution is a number that simply represents the acidity and basicity of the solution. The pH value of any solution is numerically equal to the logarithm of the inverse of the hydrogen ion (H+) concentration. Hence, the pH solution is referred to as the negative logarithm of hydrogen ion.
The basic concept of pH value
pH of Neutral Solution (Pure Water): pH of water is 7. Whenever the pH of a solution is 7, it will be a neutral solution. Such a solution will have no effect on any litmus solution or any other indicator.
pH of an Acidic Solution: All the acidic solutions have a pH of less than 7. So, whenever a solution has a pH less than 7, it will be acidic in nature and it will turn blue litmus into the red as well as methyl orange pink and phenolphthalein colourless.
pH of a basic solution: All the alkaline solution has a pH of more than 7. So, whenever a solution has more than 7 values then it will be basic in nature and it will turn red litmus to blue, methyl orange to yellow and phenolphthalein to pink.
लाला लाजपत राय का जन्म पंजाब के मोगा जिले में 28 जनवरी 1865 को एक अग्रवाल परिवार में हुआ था।
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The blow that was pushed at us this afternoon was a nail in the coffin of the British Empire. Nobody who has seen it is ever likely to forget it. It has sunk deep into our soul. We have to revenge ourselves of this cowardliness not by violently attacking them, but by gaining Long our freedom. »
Lala Lajpat Rai
30 October 1928
Died 17 November 1928.
इन्होंने कुछ समय हरियाणा के रोहतक और हिसार शहरों में वकालत की। ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गरम दल के प्रमुख नेता थे। बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल के साथ इस त्रिमूर्ति को लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाता था। इन्हीं तीनों नेताओं ने सबसे पहले भारत में पूर्ण स्वतन्त्रता की माँग की थी बाद में समूचा देश इनके साथ हो गया। इन्होंने स्वामी दयानन्द सरस्वती के साथ मिलकर आर्य समाज को पंजाब में लोकप्रिय बनाया। लाला हंसराज एवं कल्याण चन्द्र दीक्षित के साथ दयानन्द एंग्लो वैदिक विद्यालयों का प्रसार किया, लोग जिन्हें आजकल डीएवी स्कूल्स व कालेज के नाम से जानते है। लालाजी ने अनेक स्थानों पर अकाल में शिविर लगाकर लोगों की सेवा भी की थी।
30 अक्टूबर 1928 को इन्होंने लाहौर में साइमन कमीशन के विरुद्ध आयोजित एक विशाल प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जिसके दौरान हुए लाठी-चार्ज में ये बुरी तरह से घायल हो गये। उस समय इन्होंने कहा था: "मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी।" और वही हुआ भी; लालाजी के बलिदान के 20 साल के भीतर ही ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्य अस्त हो गया। 17 नवंबर 1928 को इन्हीं चोटों की वजह से इनका देहान्त हो गया।
लालाजी की मौत का बदला
लाला जी की मृत्यु से सारा देश उत्तेजित हो उठा और चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव व अन्य क्रांतिकारियों ने लालाजी पर जानलेवा लाठीचार्ज का बदला लेने का निर्णय किया।[5] इन देशभक्तों ने अपने प्रिय नेता की हत्या के ठीक एक महीने बाद अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर ली और 17 दिसम्बर 1928 को ब्रिटिश पुलिस के अफ़सर सांडर्स को गोली से उड़ा दिया। लालाजी की मौत के बदले सांडर्स की हत्या के मामले में ही राजगुरु, सुखदेव और भगतसिंह को फाँसी की सजा सुनाई गई।[6]
अनमोल वचन
1. अतीत को देखते रहना व्यर्थ है, जब तक उस अतीत पर गर्व करने योग्य भविष्य के निर्माण के लिए कार्य न किया जाए।
2. नेता वह है जिसका नेतृत्व प्रभावशाली हो, जो अपने अनुयायियों से सदैव आगे रहता हो, जो साहसी और निर्भीक हो।
3. पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ शांतिपूर्ण साधनों से उद्देश्य पूरा करने के प्रयास को ही अहिंसा कहते हैं।
4.पराजय और असफलता कभी-कभी विजय की ओर ले जाने वाली जरूरी कदम होते हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि कभी कभी होता है कि आलोचना करने वाला कौन है ये महत्वपूर्ण होता है। जो अपना है वे कहता है तो आप उसे सकारात्मक लेते हैं लेकिन जो आपको पसंद नहीं है वे कहता है तो आपको गुस्सा आता है। आलोचना करने वाले आदतन करते रहते हैं तो उसे एक बक्से में डाल दीजिए क्योंकि उनका इरादा कुछ और है।
PM मोदी ने कहा हमारे देश में अब गैजेट-उपयोगकर्ता के लिए औसतन छह घंटे का स्क्रीन-टाइम है। यह निश्चित रूप से उस समय और ऊर्जा की मात्रा को दर्शाता है जो किसी व्यक्ति द्वारा अर्थहीन और उत्पादकता के बिना निकाल दी जाती है। यह गहरी चिंता का विषय है और लोगों की रचनात्मकता के लिए खतरा है।
स्मार्टली करें हार्डवर्क-पीएम
पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि पहले काम को समझिए... हमें भी जिस चीज की जरूरत है उसी पर फोकस करना चाहिए।अगर मुझे कुछ अचीव करना है तो मुझे स्पेसिफिक एरिया पर फोकस करना होगा... तभी परिणाम मिलेगा। हमें 'स्मार्टली हार्डवर्क' करना चाहिए, तभी अच्छे परिणाम मिलेंगे।
टाइम मैनेजमेंट पर भी बोले पीएम
पीएम ने छात्रों से कहा कि केवल परीक्षा के लिए ही नहीं हमें अपने जीवन में हर स्तर पर टाइम मैनेजमेंट को लेकर जागरूक रहना चाहिए। आप ऐसा स्लैब बनाइए कि जो आपको कम पसंद विषय है उसको पहले समय दीजिए... उसके बाद उस विषय को समय दीजिए जो आपको पसंद है।
पीएम की सलाह- दबाव में न रहें छात्र
पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि दबाव में न रहें! सोचें, विश्लेषण करें, कार्य करें और फिर जो आप चाहते हैं उसे प्राप्त करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ दें।
PM नरेंद्र मोदी ने कहा कि सिर्फ परीक्षा के लिए नहीं वैसे भी जीवन में हमे समय के प्रबंधन के प्रति जागरूक रहना चाहिए। काम का ढेर इसलिए हो जाता है क्योंकि समय पर उसे नहीं किया। काम करने की कभी थकान नहीं होती, काम करने से संतोष होता है। काम ना करने से थकान होती है कि इतना काम बचा है।
पीएम मोदी ने कहा कि परिवारों को अपने बच्चों से उम्मीदें होना स्वाभाविक है, लेकिन अगर यह सिर्फ 'सामाजिक स्थिति' बनाए रखने के लिए है, तो यह खतरनाक हो जाता है।
पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि आप अच्छा करेंगे तो भी हर कोई आप से नई अपेक्षा करेगा... चारों तरफ से दबाव होता है, लेकिन क्या हमें इस दबाव से दबना चाहिए? ऐसे ही आप भी यदि अपनी एक्टिविटी पर फोकस रहते हैं तो आप भी ऐसे संकट से बाहर आ जाएंगे। कभी भी दबाव के दबाव में ना रहें।
परीक्षा पर चर्चा' मेरी भी परीक्षा है- पीएम मोदी
परीक्षा पर चर्चा' मेरी भी परीक्षा है और देश के कोटि-कोटि विद्यार्थी मेरी परीक्षा ले रहे हैं... मुझे ये परीक्षा देने में आनंद आता है।
परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम शुरू हो चुका है। पीएम नरेंद्र मोदी छात्रों से संवाद कर रहे हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी परीक्षा पे चर्चा के लिए तालकटोरा स्टेडियम पहुंचे। बच्चों द्वारा तैयार तकनीक पर आधारित मॉडल की प्रदर्शनी का निरीक्षण किया।
शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस बार तकरीबन 38 लाख 80 हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है। इनमें 31 लाख 24 हजार छात्र, 5 लाख 60 हजार शिक्षक और 1 लाख 95 हजार अभिभावक शामिल है। पिछली बार साल 2022 की तुलना में आंकडा 15.7 लाख ज्यादा है।
पीएम मोदी के परीक्षा पे चर्चा का कार्यक्रम सुबह 11 बजे से लाइव होगा। इसके बाद छात्र, टीचर और अभिभावक यह प्रोग्राम देख सकेंगे। कार्यक्रम का आयोजन तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री इस संवाद कार्यक्रम के दौरान तनाव को पीछे छोड़ने और परीक्षा के डर को दूर करने तथा परीक्षा को त्योहार की तरह मनाने के टिप्स साझा करेंगे।
इस साल पीपीसी यानी परीक्षा पे चर्चा 2023 के छठे संस्करण के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया 25 नवंबर से शुरू हुई थी, जो 30 दिसंबर, 2022 तक चली थी।
President Droupadi Murmu received President Abdel Fattah El-Sisi of Egypt at Rashtrapati Bhavan and hosted a banquet in his honour. The President said that India appreciates Egypt's leading role in promoting peace, prosperity and stability in the West Asia region.
2 Sal guzar chuker hain jab se Inglistan Burma par dobara qabza karn ka geet alapta phirta hai. Har barsit ke khatam hone par yih Angrez apne behuda elan ko dhorate rahe. Kitna mazhaka-khez hai ki Burma ki taras bhrhne ke bajne wah qadam baqadam piche hatte jarahe hain. Ap logon men se jinhon ne front par kuch din ruzare hain wuh hamse ziada janta hain kih aaya hamari batai hui haqiqat kahan ta sahih hai. In tamam baton se ap kia andaza nahin laga sakte hain? Iske mani yih hue kih Japan ke khilaf Angre- zon ki tamam taqat khatam hogai hai. Japani faujon ki madad se ham yani Azad Hind Fauj Dehli ke taraf barhne age hain. Hamari Indian National Army aur British Army men bahut bara farq hai kionkih hamari fauj men kisi ko jabran larne par majbur nahin kia jata. Hamari is fauj ka har ek shaksh apne mulk ki muhabbat men choor, apne dushmanon se larne ke lie taiur rehta hai. Is men koi hak nahin kih is sunehre manga se facda utha lar hamari is fauj se miljno aur apne mulk Hindustan se ger-mulki Angrezon ka atar nikal baher karo.
Subhas Chandra Bose.
बर्मा पर दोबारा कब्ज़ा करना गेर-मंकिन है।
2 साल गुजर चुके हैं जब से इंग्लैंड बर्मा पर दोबारा कब्ज़ा करना का गीत अलापता फिरता है। हर बरसात के खत्म होने पर यह अंग्रेजी अपने बेहुदा एलन को धोराते रहे। कितना मज़हका-खेज़ है कि बर्मा की तरस भरने के बजने वह क़दम बक़दम पीछे हटे जराहे हैं। आप लोगों में से जिन्होन ने फ्रंट पर कुछ दिन रुजारे हैं वु हमसे जिदा जनता है कि आया हमारी बाताई हुई हकीकत कहां ता सही है। सभी बातों से आप अंदाज़ नहीं लगा सकते हैं? इसके मणि ये हुए कि जापान के खिलाफ अंग्रे- ज़ोन की तमाम ताकत खत्म होगी। जापानी फौज की मदद से हम यानी आजाद हिंद फौज दिल्ली के तरफ बढ़ने की उम्र है। हमारी इंडियन नेशनल आर्मी और ब्रिटिश आर्मी के जवान बहुत ज्यादा फर्क है कि हमारी फौज में किसी को जबरन पर मजबूर नहीं किया जाता। हमारी इस फौज का हर एक शाक्ष अपने मुल्क की मुहब्बत में चूर, अपने दुश्मनों से सीखने के लिए तैयर रहता है। क्या आदमी कोई हक नहीं कि इस सुनहरी मंगा से फकदा उठा ले हमारी इस फौज से मिलने और अपने मुल्क हिंदुस्तान से गैर-मुल्की अंग्रेजों का अतर निकल बाहर करो।
सुभाष चंद्र बोस.
Friends! Countrymen! Today I have the unique privilege of sending you my heartiest greetings from the soil. Let the example of J independent liberated Burma inspire tell last attack on British Imperiation. The Indian National brany. the Azai Hind Jay- - commence the last onslaught. Even now drilling wit ready to our sisters in East bien rifles and bayonets We shall We shall com be coming. soon be setting up the "second" Front" which will helps you to pull down British Ray, once for will. Tall our comrades is prison to the of good cheer. The day of their literation is not far off. Meanwhile, complete all your preparations, and wait for the "zers howe when we shell appear on to Indian frontier. Then, rise no the and tick out the
accursed Britisher from our holy land. And get Country in de British trung t occupation to join you and me in the sacred struggle for India's freedom, where the signal is Richold the down 7 Ladie's liberty! Inquilat Zundated! Azal Mind Zindabad!
Subhas Chandra Bose.
1st August. 19.43
Indian Soldiers! Why kill your own Brothers?
Your unarmed brothers and sisters are fighting the British for India's independence. And the British order you to shoot them down all over India. Disobey this order, and turn round and shoot the Britisher who gives the order. Do not fear the consequences. The British dare not do you any real harm. If they confiscate your property and investments, rest assured that your brave comrades from East Asia will be with you very All your properties and investments will be restored to you. We shall seize everything that belongs to the British and compensate you liberally. The British dare not massacre your regiments for disobeying their order. They know that you can wipe out the whole British population in India. They are cowards; so, do not fear. If, however, they kill some of you, your sons and grandsons will be proud of your memory. You will rank with India's great martyrs like Ranjitsingh and Tippa Sultan.
सऊदी अरब ने अमिताभ बच्चन को जॉय अवार्ड से सम्मानित किया
रविवार 22 जनवरी 2023 01:24 अपराह्न
भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन को सऊदी अरब द्वारा जॉय अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार फिल्म उद्योग में आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले लगभग 20 लोगों को सम्मानित किया गया।
विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिभाओं को सम्मानित करने के लिए सऊदी जनरल एंटरटेनमेंट अथॉरिटी द्वारा आयोजित पुरस्कार समारोह के तीसरे संस्करण में अमिताभ बच्चन को सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम एमबीसी ग्रुप के सहयोग से रियाद बॉलीवुड सिटी के बकर अल शेडडी थिएटर में आयोजित किया गया था। बॉलीवुड के अपने ही बिग बी को मध्य पूर्व क्षेत्र के सबसे बड़े पुरस्कार स्थल पर फिल्म उद्योग में लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए जॉय अवार्ड मिला।
जॉय अवार्ड के लिए सिनेमा, संगीत, थिएटर और सामाजिक क्षेत्रों के लगभग 200 कलाकार प्रतिस्पर्धा कर रहे थे, जिनमें से इस बार पुरस्कार के लिए विभिन्न क्षेत्रों के 20 लोगों का चयन किया गया। पिछले साल प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई थीं। पुरस्कार रात में सऊदी मनोरंजन प्राधिकरण के अध्यक्ष तुर्की अलुशिख ने भाग लिया। समारोह विभिन्न क्षेत्रों में प्रसिद्ध प्रतिभाओं और एक बड़ी भीड़ की उपस्थिति के लिए प्रसिद्ध फिल्म निर्देशकों, अभिनेताओं, गायकों और अन्य कला और खेल सितारों से अरब दुनिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय था। अभिताब बच्चन ने कहा कि वह इतने प्रतिष्ठित मंच पर इस तरह का पुरस्कार पाकर खुश हैं और इसके लिए चुने जाने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।
2024 पेरिस ओलंपिक खेलों की आयोजन समिति ने घोषणा की कि वह 1 दिसंबर से टिकटों की प्री-सेल शुरू करेगी
2024 पेरिस ओलंपिक खेलों के टिकटों की पूर्व बिक्री का पहला चरण शुरू होगा। 1 दिसंबर, 2022 से 31 जनवरी, 2023 तक, ऑनलाइन पंजीकरण का पहला चरण दुनिया भर के दर्शकों के लिए खुला रहेगा
यदि आप चुने जाते हैं, तो आपके पास 13 फरवरी से 15 मार्च, 2023 तक बिक्री के पहले चरण के लिए पैकेज टिकट खरीदने का अवसर होगा।
फ्रांसीसी मीडिया ने कहा कि पंजीकरण के इस चरण में जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। लॉटरी सभी पंजीकरणकर्ताओं के लिए खुली होगी, और चुने जाने की संभावनाएं समान हैं चाहे वे पहले दिन पंजीकरण करें या अंतिम दिन।
यदि आपने लॉटरी में भाग लिया है, तो आपको मार्च 2023 के मध्य से पहले अपने मेलबॉक्स पर ध्यान देना होगा। पेरिस ओलंपिक आयोजन समिति विजेताओं को सूचित करेगी ताकि वे टिकट खरीदने का अधिकार प्राप्त करने के लिए 48 घंटों के भीतर भुगतान कर सकें।
प्रत्येक टिकट पैकेज में कम से कम तीन टिकट होते हैं, और विजेता एक या अधिक खेल और विभिन्न प्रकार के टिकट चुन सकते हैं। प्रत्येक पंजीकृत खाता अधिकतम 30 टिकट खरीद सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण में 80% टिकट खरीदे जा सकते हैं और शेष 20% सबसे लोकप्रिय आइटम हैं। जैसे ट्रैक एंड फील्ड 100-मीटर फ़ाइनल, जूडो हैवीवेट फ़ाइनल, आदि, ये टिकट 15 मार्च से 15 अप्रैल, 2023 तक पंजीकरण ड्रा के दूसरे चरण में प्री-सेल किए जाएंगे, और 15 मार्च, 2023 तक बिक्री पर जाने की उम्मीद है। मई 2023।
पेरिस ओलंपिक आयोजन समिति द्वारा घोषित मूल्य के अनुसार, टिकट की कीमत 24 यूरो से शुरू होती है, और 50% टिकट 50 यूरो से अधिक नहीं होंगे।
पेरिस ओलंपिक का शुभंकर
. 2024 पेरिस का शुभंकर
ओलंपिक खेलों का नाम Phryges होगा। Phryges पारंपरिक फ्रेंच Phrygian टोपी का एक मानवरूपी प्रतिनिधित्व है। "स्मर्फ़्स कार्टून में, स्मर्फ़ फ़्रीजियन टोपी पहनते हैं।
दो Phrygies क्रमशः 2024 पेरिस ओलंपिक और 2024 पेरिस पैरालिंपिक का प्रतिनिधित्व करते हैं। पेरिस ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों में एक ही शुभंकर छवि का उपयोग किया जाएगा, लेकिन थोड़े अलग विवरण के साथ।
आयोजन समिति के अनुसार शुभंकर का मुख्य भाग त्रिकोणीय आकार का है। रंग योजना मुख्य रूप से लाल है, जो नीले और सफेद रंग से पूरक है। यह फ्रांस के झंडे के तीन रंगों से भी मेल खाता है।
पेरिस ओलंपिक खेलों का प्रतीक और पांच-रिंग लोगो पेरिस ओलंपिक खेलों के शुभंकर की छाती पर मुद्रित होते हैं, जबकि पैरालंपिक खेलों के शुभंकर ने पांच-रिंग लोगो को अंतर्राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति के लोगो में बदल दिया है। इसके अलावा, दो शुभंकरों के बीच एक और अंतर यह है कि पैरालंपिक शुभंकर में एक "पैर" है जिसे एक कृत्रिम अंग के रूप में डिज़ाइन किया गया है।
पेरिस ओलंपिक आयोजन समिति के अध्यक्ष ने कहा: "ओलंपिक आंदोलन के लिए, शुभंकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे खेलों को लोगों के साथ निकटता से जोड़ते हैं और एक अच्छा ओलंपिक माहौल और स्टेडियम के अंदर और बाहर एक भव्य उत्सव का माहौल बनाते हैं, जो है एक महान मूल्य।"
आयोजन समिति ने मौके पर परिचय देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस शुभंकर के माध्यम से वे इस विश्वास को व्यक्त कर सकते हैं कि खेल में सब कुछ बदलने की ताकत है। यह आशा की जाती है कि मानव विकास की प्रक्रिया में खेल अधिक सामाजिक मूल्य निभा सकते हैं।